मानसून खत्म होने के बावजूद जलाशयों में पानी की कमी किसानों के लिए चिंता बनी हुई है। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों में देश के 178 प्रमुख जलाशयों का भंडारण उनकी पूरी उपयोगी क्षमता से करीब 31 प्रतिशत कम था। रिपोर्ट ने दक्षिणी राज्यों में गंभीर जल संकट के साथ सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन पर संभावित असर की चिंता जताई है।
रिपोर्ट का आधार केंद्रीय जल आयोग का जलाशय बुलेटिन है। किसानों के लिए इन आंकड़ों का मतलब है कि मानसून समाप्त होने को पर्याप्त पानी उपलब्ध होने का संकेत नहीं माना जा सकता। आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता की चिंता खासकर उन क्षेत्रों में है, जहां रिपोर्ट ने भंडारण सामान्य से काफी नीचे बताया है।
पूरी क्षमता और सामान्य भंडारण, दोनों से पीछे
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन जलाशयों में 126.717 बिलियन घन मीटर पानी था। यह उनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का 68.58 प्रतिशत था, जबकि 31.42 प्रतिशत हिस्सा खाली था। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले भंडारण 24.53 प्रतिशत कम था। सामान्य स्तर से तुलना करने पर कमी 16.44 प्रतिशत थी।
इन तुलनाओं का आधार अलग है। पूरी उपयोगी क्षमता बताती है कि जलाशयों में कितना इस्तेमाल योग्य पानी रखा जा सकता है। वहीं, रिपोर्ट में सामान्य स्तर का आधार पिछले 10 वर्षों का औसत भंडारण है। इसलिए जलाशय का पूरी क्षमता तक न भरना और उसमें सामान्य से कम पानी होना अलग बातें हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों में दोनों पैमानों पर कमी दिखी है।
दक्षिण और पश्चिम के कई जलाशयों में बड़ी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के अलियार में सामान्य स्तर के मुकाबले जलभंडारण दर्ज नहीं हुआ। आंध्र प्रदेश के सोमसिला में सामान्य भंडारण का 22.05 प्रतिशत और श्रीशैलम में 33.64 प्रतिशत पानी था। तमिलनाडु के मेट्टूर में यह स्तर 32.49 प्रतिशत रहा, जबकि केरल के इडुक्की में 10.62 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र के जलाशयों में भी रिपोर्ट ने बड़ी कमी बताई है। जयकवाड़ी में सामान्य के मुकाबले 15.55 प्रतिशत, उजनी में 10.62 प्रतिशत, मांजरा में 12.45 प्रतिशत और लोअर तेरना में 28.24 प्रतिशत भंडारण था। कर्नाटक के घाटप्रभा में सामान्य स्तर का 22.56 प्रतिशत और तुंगभद्रा में 22.54 प्रतिशत पानी था।
ये आंकड़े पूरी क्षमता के नहीं, सामान्य भंडारण के अनुपात हैं। इन जलाशयों पर निर्भर सिंचाई के लिए स्थानीय स्थिति देखना जरूरी है। देश का औसत अकेले किसी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता नहीं बताता, क्योंकि रिपोर्ट में कई जलाशयों का भंडारण सामान्य स्तर के आधे से भी नीचे मिला है।
पेन्नार और कावेरी घाटियों में ज्यादा चिंता
नदी घाटियों की तुलना में भी रिपोर्ट ने बड़ा अंतर दिखाया है। पेन्नार का भंडारण सामान्य से 72.32 प्रतिशत कम था और कावेरी में कमी 60.50 प्रतिशत थी। दोनों को अत्यधिक कमी वाली श्रेणी में रखा गया। कृष्णा घाटी में पानी सामान्य से 32.59 प्रतिशत और साबरमती में 38.03 प्रतिशत कम था।
इसके उलट, रिपोर्ट के मुताबिक नर्मदा में भंडारण सामान्य से 7.81 प्रतिशत ज्यादा था। महानदी में यह बढ़त 2.95 प्रतिशत और स्वर्णरेखा में 30.74 प्रतिशत थी। गंगा, तापी, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र और ब्राह्मणी-बैतरणी घाटियों का भंडारण सामान्य के करीब बताया गया। इसलिए दक्षिणी घाटियों की गंभीर कमी को पूरे देश की एक जैसी स्थिति मानना सही नहीं होगा।
आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता पर नजर
रिपोर्ट में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 20 जलाशयों में से 12 का भंडारण सामान्य या उससे नीचे बताया गया है। रिपोर्ट ने इस स्थिति को सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन पर संभावित असर की चिंता से जोड़ा है। यह जोखिम का संकेत है, सिंचाई आपूर्ति में कटौती की पुष्टि नहीं।
आगे जलभंडारण में बदलाव समझने के लिए साप्ताहिक स्थिति देखना उपयोगी होगा। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग हर गुरुवार इन प्रमुख जलाशयों के जलस्तर का बुलेटिन जारी करता है। किसानों के लिए देश के कुल भंडारण के साथ अपने क्षेत्र के जलाशय और नदी घाटी की स्थिति देखना ज्यादा प्रासंगिक रहेगा।
किसान इन बातों का ध्यान रखें
- अपने क्षेत्र के जलाशय का भंडारण देखें, केवल देश के औसत के आधार पर सिंचाई की योजना न बनाएं।
- आंकड़ा पढ़ते समय देखें कि प्रतिशत पूरी उपयोगी क्षमता का है या सामान्य भंडारण का। दोनों को एक न मानें।
- साप्ताहिक जलाशय बुलेटिन में अपने क्षेत्र की स्थिति और भंडारण में बदलाव पर नजर रखें।
- पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती और सिंचाई की योजना बनाने के लिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।
स्रोत
- India's reservoirs remain 31% below full capacity after monsoon; southern states face water shortages, डाउन टू अर्थ (Down To Earth) की रिपोर्ट, 19 अक्टूबर 2026





