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मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का खतरा, दक्षिण में खेतों से पानी निकालने की सलाह

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून लौट चुका है, लेकिन दक्षिण में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। किसानों के लिए जलनिकासी, छिड़काव रोकने और कटी फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

एग्रीवाणी डेस्क · 4 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: हरे खेतों के ऊपर बारिश के बादल
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Péter Kövesi / Pexels

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून लौट चुका है, फिर भी कई क्षेत्रों में बारिश और आंधी का खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट में 16 अक्टूबर, 2026 की सुबह के मौसम पूर्वानुमान का हवाला देकर दक्षिण भारत में तेज बारिश की आशंका बताई गई है। खेती के लिए इसका मतलब है कि मानसून की विदाई को बारिश का खतरा खत्म होना न मानें।

रिपोर्ट में किसानों को अतिरिक्त पानी की निकासी का इंतजाम करने, छिड़काव टालने और कट चुकी फसल को ढककर रखने की सलाह दी गई है। पानी और सिंचाई से जुड़े काम तय करते समय बारिश की चेतावनी पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने की स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है।

दक्षिण में बारिश का जोर क्यों बना है

रिपोर्ट में दक्षिण की बारिश को पूर्वोत्तर मानसून और दूसरी मौसमी प्रणालियों से जोड़ा गया है। इसके अनुसार, उत्तरी पंजाब के आसपास पश्चिमी विक्षोभ से संबंधित चक्रवाती परिसंचरण मौजूद था। अन्य क्षेत्रों में भी ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय बताए गए हैं। इन्हीं परिस्थितियों के बीच अलग-अलग इलाकों में बारिश, बिजली और हवा का पूर्वानुमान दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, 16 अक्टूबर, 2026 के लिए तमिलनाडु के साथ पुडुचेरी, कराईकल और कर्नाटक के दक्षिण आंतरिक हिस्सों में बहुत भारी बारिश तक की आशंका थी। इन क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट का उल्लेख है और संभावित बारिश 115.6 से 204.4 मिमी बताई गई है।

इसी पूर्वानुमान में केरल और माहे के अलावा आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक के तटीय हिस्सों के लिए भारी बारिश का अंदेशा था। रिपोर्ट में यहां येलो अलर्ट और 64.5 से 115.5 मिमी बारिश की संभावना बताई गई है। ये आंकड़े पूर्वानुमान के हैं, दर्ज हुई बारिश के नहीं।

जलभराव वाले क्षेत्रों में निकासी पर ध्यान

रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बरसात के बीच दक्षिण के कुछ क्षेत्रों में पानी भरने और अचानक बाढ़ आने का खतरा था। तमिलनाडु में नीलगिरि, इरोड और थेनी के अलावा कुड्डालोर तथा विलुप्पुरम का उल्लेख किया गया है। केरल में पलक्कड़ व एर्नाकुलम और कर्नाटक में चिक्कमगलुरु व कोडागु को भी सतर्कता वाले क्षेत्रों में रखा गया है।

इन क्षेत्रों के लिए रिपोर्ट में बताए गए अगले 24 घंटों की सतर्कता का संदर्भ 16 अक्टूबर, 2026 की रिपोर्ट से है। निचली जमीन पर पानी की स्थिति देखते रहने, नदी और नालों के पास जाने से बचने तथा प्रशासन के निर्देश मानने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का इंतजाम इसी चेतावनी का अहम हिस्सा है।

रिपोर्ट में उससे पहले के 24 घंटों की बारिश भी दर्ज है। कराईकल में 60 मिमी और कोयंबटूर के पीलेमेडु में भी 60 मिमी बारिश हुई थी। तिरुपति में दर्ज वर्षा 50 मिमी थी, जबकि बेंगलुरु में 30 मिमी बारिश बताई गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बौछारों का अंदेशा था

रिपोर्ट के मुताबिक, 16 अक्टूबर, 2026 के पूर्वानुमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के साथ हरियाणा, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में गरज वाली बारिश का अंदेशा था। हवा की संभावित गति 40 से 50 किमी प्रति घंटा बताई गई थी। दिल्ली-एनसीआर में भी हल्की बरसात, बिजली चमकने और तेज हवा की संभावना का उल्लेख था।

रिपोर्ट में तेज हवा से कृषि उपकरणों और अस्थायी ढांचों को बचाने की सलाह दी गई है। बिजली चमकने पर खुले खेत, जलाशय और पेड़ों के नीचे रुकने से बचने को भी कहा गया है। आगे के कृषि काम के लिए रिपोर्ट ने ताजा मौसम पूर्वानुमान और स्थानीय चेतावनियां देखते रहने पर जोर दिया है।

किसान इन कामों को प्राथमिकता दें

  • रिपोर्ट की सलाह के अनुसार, भारी बारिश की आशंका वाले क्षेत्रों में खेत का अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था रखें।
  • मौसम ठीक होने तक कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव स्थगित रखें।
  • कट चुकी फसल को ढकी और सुरक्षित जगह रखें। तेज हवा से उपकरणों तथा अस्थायी ढांचों की सुरक्षा करें।
  • बिजली चमकने या आंधी के समय पेड़ के नीचे न रुकें। खुले स्थान और जलाशयों से हटकर सुरक्षित पक्के भवन में जाएं।
  • ताजा पूर्वानुमान और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी देखें। सिंचाई संबंधी स्थानीय निर्णय के लिए कृषि विभाग से सलाह लें।

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी डेस्क

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