ग्रामीण आजीविका मिशन में महिला समूहों का डिजिटल रिकॉर्ड केवल काम की निगरानी तक सीमित रखने के बजाय कर्ज और उद्यमों से जुड़े फैसलों का आधार बनाने पर जोर दिया गया है। किसान परिवारों के लिए इस खबर का संबंध खास तौर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की बचत, कर्ज और आजीविका से है।
पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 12 और 13 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। हरियाणा के गुरुग्राम में हुए इस आयोजन का केंद्र डिजिटल आंकड़ों की व्यवस्था सुधारना और प्रमाणों के आधार पर सीखना था। यह कार्यशाला दीनदयाल अंत्योदय योजना के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हुई।
समूहों से आगे उद्यम और समृद्धि पर ध्यान
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से करीब 10 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। इन महिलाओं ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण लिया है। उन्होंने अगले चरण में लगभग 87 लाख उद्यमों को मजबूती देने की जरूरत बताई। साथ ही लखपति दीदी के छह करोड़ के लक्ष्य की दिशा में प्रगति पर नजर रखने को कहा।
अतिरिक्त सचिव विपिन कुमार ने मिशन की आगे की दिशा समझाई। जोर केवल महिलाओं को जोड़ने पर नहीं, उनकी समृद्धि बढ़ाने पर होगा। इसी तरह कर्ज उपलब्ध होने के साथ उसकी गुणवत्ता और संस्थाओं को सहारे पर चलाने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने को महत्व दिया गया। समूहों से जुड़े किसान परिवारों के लिए इसका मतलब है कि चर्चा में सदस्यता और ऋण के साथ आजीविका के परिणाम भी केंद्र में हैं।
बचत और कर्ज चुकाने का डिजिटल रिकॉर्ड क्यों जरूरी
कार्यशाला में लोकओएस को बैंकिंग पोर्टल से जोड़ने की दिशा रखी गई, ताकि डिजिटल माध्यम से कर्ज की प्रक्रिया में रुकावटें कम हों। कंसल ने इसे कामकाज में उपयोग होने वाला मंच बनाने पर जोर दिया। आंकड़ों की भूमिका केवल निगरानी दिखाने वाले डैशबोर्ड तक नहीं, बल्कि निर्णय लेने में मदद करने तक बढ़ाने की बात कही गई।
विपिन कुमार के मुताबिक, महिला की बचत और ऋण भुगतान के व्यवहार से लोकओएस पर उसकी विश्वसनीयता का डिजिटल रिकॉर्ड बन सकता है। समूह से जुड़ी ग्रामीण महिला के लिए इसका महत्व यह है कि उसके वित्तीय व्यवहार को व्यवस्थित रूप में दर्ज किया जा सके। यह बेहतर ऋण की दिशा से जुड़ी संभावना है, अपने आप कर्ज मंजूर होने की घोषणा नहीं।
आंकड़ों पर महिलाओं के अधिकार को भी महत्व दिया गया। कुमार ने स्पष्ट किया कि डेटा उसे तैयार करने वाली महिलाओं का है और उसका उपयोग उन्हीं के हित में होना चाहिए। इसलिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके उपयोग का उद्देश्य भी महिलाओं का फायदा होना चाहिए।
सही आंकड़ों से परिवार और उद्यम के परिणाम समझेंगे
कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों, वीओ और सीएलएफ की प्रोफाइल डिजिटल बनाने तथा लोकओएस में वित्तीय लेनदेन दर्ज करने की प्रगति देखी गई। सदस्य और संस्था संबंधी जानकारी की जांच को लेनदेन समझने, पुराने कर्ज का रिकॉर्ड देखने और कार्यक्रम का विश्लेषण करने की बुनियाद बताया गया। आंकड़े पूरे, सही, आपस में मेल खाने वाले, अद्यतन और जांचे हुए रखने पर जोर रहा।
आगे निगरानी में परिवारों, संस्थाओं और उद्यमों के परिणामों को महत्व दिया जाएगा। लोकओएस के रिकॉर्ड को प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल करने और अलग योजनाओं के प्रशासनिक आंकड़ों को जोड़ने की दिशा रखी गई है। इससे मिशन का ध्यान केवल गतिविधियां दर्ज करने के बजाय उनके परिणाम समझने पर रहेगा।
आगे व्यवस्था और प्रशिक्षण पर काम
मंत्रालय राज्यों के आजीविका मिशनों और तकनीकी साझेदारों के साथ काम कर रहा है। इसमें संचालन और तकनीकी व्यवस्था की समस्याएं सुलझाना, जिम्मेदारियां तथा समय सीमाएं स्पष्ट करना शामिल है। मैदानी कर्मियों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण व मार्गदर्शन मजबूत करने पर भी ध्यान है।
राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों से आपसी सीख बढ़ाई जाएगी। प्रमाण तैयार करने और फैसलों में उनका उपयोग करने की राज्यों की क्षमता मजबूत करने में भी निवेश किया जाएगा। कार्यशाला में राज्य मिशनों के अलावा नीति आयोग, नाबार्ड, वित्तीय संस्थानों और विकास साझेदारों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
समूहों से जुड़े किसान परिवार इन बातों पर ध्यान दें
- समूह और सदस्य के डिजिटल रिकॉर्ड में जानकारी पूरी, सही और अद्यतन रखने को महत्व दें।
- बचत, वित्तीय लेनदेन और कर्ज भुगतान के रिकॉर्ड पर ध्यान दें। इन्हीं से महिला का वित्तीय व्यवहार समझने में मदद मिल सकती है।
- डेटा का उपयोग महिलाओं के हित में होने की बात को समूह की चर्चा में जगह दें।
- उद्यम की प्रगति और परिवार की आजीविका के परिणामों को महत्व दें, क्योंकि मिशन की आगे की निगरानी में इन पर जोर रहेगा।
स्रोत
- 12 और 13 अक्टूबर, 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम में 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत 'डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने और साक्ष्य-आधारित शिक्षा' पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), ग्रामीण विकास मंत्रालय, 15 अक्टूबर 2026





