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मत्स्य पालन समझौते में भारत के प्रवेश को मंजूरी, समुद्र में बढ़ेंगे अवसर

दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौते में प्रवेश के लिए भारत को केंद्र की मंजूरी मिल गई है। इससे भारतीय मत्स्य उद्यमों के लिए नए अवसर बनेंगे और संसाधनों के प्रबंधन में देश की भागीदारी बढ़ेगी।

एग्रीवाणी डेस्क · 3 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: मछली पकड़ने वाली नाव
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Meriç Tuna / Pexels

खुले समुद्र में भारतीय मत्स्य उद्यमों का काम बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने फैसला लिया है। दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौते में प्रवेश के लिए भारत को मंजूरी मिल गई है। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, इससे समझौते के दायरे में भारतीय ध्वज वाले पोतों को मछली पकड़ने के अधिकृत अवसर मिलेंगे।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने इसे समुद्री अर्थव्यवस्था और संसाधनों के टिकाऊ उपयोग से जोड़ा है। सरकार ने दिसंबर, 2025 में खुले समुद्र में मत्स्य पालन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए थे। अब यह समझौता अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भारतीय बेड़े का विस्तार करने के लिए क्षेत्रीय व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।

किन मछुआरों और उद्यमों को मिलेगा अवसर

इस फैसले का संबंध भारतीय ध्वज के तहत चलने वाले मत्स्य पोतों और उद्यमों से है। समझौते के अधिकार वाले क्षेत्र में उन्हें स्क्विड, टूथफिश और अल्फोंसो जैसी प्रजातियां पकड़ने का अवसर मिलेगा। अन्य गैर प्रवासी मछली भंडार भी इसके दायरे में हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इससे मछुआरों और उद्यमियों के लिए काम की नई संभावनाएं बनेंगी।

अधिक मूल्य वाले समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग करने के वैध अधिकार स्थापित करना इस कदम का अहम पक्ष है। साथ ही, खुले समुद्र में भारतीय बेड़े की मान्यता प्राप्त मौजूदगी मजबूत होगी। मंत्रालय ने संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने को मछुआरा समुदायों की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण बताया है।

सीमित भागीदारी से आगे बढ़ेगा भारत

भारत इस समझौते से 2022 में सहयोगी गैर अनुबंधित पक्ष के रूप में जुड़ा था। अभी वैज्ञानिक समिति और अनुपालन समिति सहित प्रमुख निकायों में फैसले लेने की उसकी भूमिका सीमित है। विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रवेश के बाद इन निकायों में भारत पूरी तरह भाग ले सकेगा।

इसके साथ वैज्ञानिक आंकड़ों और अनुसंधान कार्यक्रमों तक भारत की पहुंच बढ़ेगी। मछली भंडारों के आकलन में भी भागीदारी का अवसर मिलेगा। अन्य सहभागी पक्षों के साथ सहयोग से समुद्री संसाधनों को बेहतर समझने और उनका टिकाऊ दोहन करने में मदद मिलेगी। अवैध, बिना अभिलेख और अनियमित तरीके से मछली पकड़ने की रोकथाम भी सहयोग का हिस्सा होगी।

निरीक्षण और तटीय सुरक्षा में क्या होगा

समझौते में खुले समुद्र पर पोतों में चढ़कर जांच और निरीक्षण करने की योजना अपनाई गई है। पीआईबी की विज्ञप्ति बताती है कि इसे लागू किया जाना है और भारत इसमें सक्रिय भूमिका निभाएगा। मंत्रालय के अनुसार, यह भागीदारी देश की तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

टूना प्रबंधन से अलग है समझौते का दायरा

हिंद महासागर टूना कमीशन और यह समझौता हिंद महासागर में मत्स्य संसाधनों के क्षेत्रीय प्रबंधन की प्रमुख व्यवस्थाएं हैं। भारत टूना कमीशन में 1996 से अनुबंधी पक्ष है। कमीशन का काम अत्यधिक प्रवासी टूना तथा उससे मिलती प्रजातियों का प्रबंधन करना है। इसके विपरीत, दक्षिणी हिंद महासागर के इस समझौते में अत्यधिक प्रवासी प्रजातियां शामिल नहीं हैं। इसलिए नए अवसरों को समझते समय प्रजातियों और समझौते के क्षेत्र का फर्क महत्वपूर्ण है।

मछुआरों और मत्स्य उद्यमियों के लिए काम की बातें

  • नए अवसरों को भारतीय ध्वज वाले मत्स्य पोतों और उद्यमों के संदर्भ में समझें।
  • मछली पकड़ने की संभावनाएं देखते समय समझौते के क्षेत्र और उसके दायरे में आने वाली प्रजातियों का ध्यान रखें।
  • संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन और टिकाऊ उपयोग को इस व्यवस्था का जरूरी हिस्सा मानें।
  • अवैध मछली पकड़ने की रोकथाम तथा पोतों की जांच और निरीक्षण संबंधी व्यवस्था पर भी ध्यान दें।

स्रोत

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी डेस्क

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