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सांची में महिला किसानों की पहचान पर जोर, 46 ग्रामीण सड़कों का भूमिपूजन

सांची में महिला किसान दिवस के कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने खेती में महिलाओं के योगदान को औपचारिक पहचान देने पर जोर दिया। रायसेन और विदिशा से आजीविका अभियान शुरू करने की बात कही और 46 ग्रामीण सड़कों का भूमिपूजन किया।

एग्रीवाणी डेस्क · 4 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: हरे-भरे खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Dawid K / Pexels

सांची में 16 अक्टूबर 2026 को महिला किसान दिवस के कार्यक्रम में खेती करने वाली महिलाओं को किसान के रूप में औपचारिक पहचान देने का मुद्दा उठा। केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए प्रयास करने की बात कही। महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमों से जोड़ने और परिवारों की कमाई के स्थायी रास्ते बनाने पर भी जोर दिया गया।

पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, चौहान ने इस दौरे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 46 सड़कों का भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि सड़कें बनने से गांवों में आने-जाने की सुविधा बेहतर होगी। कार्यक्रम में ग्रामीण आवास की स्वीकृतियों और अतिरिक्त मकानों की जरूरत का ब्यौरा भी रखा गया।

जमीन के मालिकाने से आगे किसान की पहचान

चौहान ने कहा कि किसान की पहचान तय करते समय जमीन का मालिकाना ही नहीं, खेती में किया गया वास्तविक काम भी देखा जाना चाहिए। खेत में मेहनत करने वाली महिलाओं को उनकी भूमिका के अनुरूप पहचान और सम्मान मिलना जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे को संबंधित मंचों पर उठाने का आश्वासन दिया।

यह बात उन महिलाओं के काम से जुड़ी है जो फसल उगाने के साथ पशुओं को संभालती हैं, दूध निकालती हैं और चारे का इंतजाम करती हैं। मंत्री ने फल-सब्जियों और औषधीय पौधों की खेती के अलावा मछली और मुर्गी पालन में भी महिलाओं के योगदान का उल्लेख किया। इस तरह चर्चा केवल खेत के स्वामित्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि कृषि से जुड़े अलग-अलग काम करने वाली महिलाओं की पहचान पर केंद्रित थी।

रायसेन और विदिशा से आजीविका अभियान

रायसेन और विदिशा में एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने की बात कही गई। इसका उद्देश्य गांव के प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक कमाई का जरिया तैयार करना है। लक्ष्य परिवारों को स्थायी आय के अवसर देकर गांवों को गरीबी से बाहर निकालना है।

इसके लिए खेती के साथ कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाने, प्रसंस्करण करने, पशुपालन और छोटे कारोबार जैसे रास्ते बताए गए। बकरी और मछली पालन भी इनमें शामिल हैं। मंत्री का जोर केवल सहायता देने के बजाय रोजगार और कमाई के अवसर उपलब्ध कराने पर रहा। इस अभियान में महिला किसानों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।

महिलाओं के उद्यमों के लिए सहयोग का भरोसा

महिलाओं को बड़ी, पापड़ और अचार बनाने जैसे कामों के साथ कृषि आधारित छोटे उद्योगों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जहां दलहन ज्यादा पैदा होता है, वहां छोटी दाल मिल लगाने का उदाहरण दिया गया। तेल निकालने और टमाटर का केचप बनाने जैसे उद्यमों का भी उल्लेख हुआ। इनका मकसद कृषि उत्पादों की कीमत बढ़ाकर महिलाओं की आय बेहतर करना है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, मंत्री ने मशीनों, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग की व्यवस्था के लिए प्रयास करने की बात कही। वित्तीय सेवाओं के साथ लाइसेंस, जरूरी कागजात और मार्गदर्शन की जरूरत भी बताई गई। कम गारंटी या बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास का भरोसा दिया गया। ये सहयोग की दिशा में किए जाने वाले प्रयास हैं, इन्हें मिलने वाले ऋण की गारंटी न मानें।

महिला किसान मंच की पहल का स्वागत करते हुए इसे अनुभव बांटने और आपस में सीखने का माध्यम बताया गया। इसमें पुरुषों की सहभागिता की भी बात रखी गई, ताकि महिलाओं को आगे बढ़ाने में सामूहिक सहयोग मिल सके।

सड़कों का निर्माण और ग्रामीण भागीदारी

46 ग्रामीण सड़कों के भूमिपूजन के बाद चौहान ने अच्छे स्तर का निर्माण कराने की बात कही। ग्रामीणों के लिए इसका बताया गया फायदा बेहतर आवागमन और सुविधाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शिलान्यास के पत्थर उन्हीं गांवों में लगाए जाएं जिनसे सड़कें संबंधित हैं।

सड़क का काम शुरू होने पर गांव में ही शिलान्यास कार्यक्रम रखने का सुझाव भी दिया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। भूमिपूजन को सड़क बनकर तैयार होने से अलग समझना जरूरी है, कार्यक्रम में आगे निर्माण कराने की बात कही गई है।

पक्के मकानों की जरूरत भी सामने रखी

चौहान ने बताया कि सांची विधानसभा क्षेत्र में 2025-26 के लिए 3,081 मकानों को मंजूरी मिली है। 2024-25 की स्वीकृति 5,035 मकानों की है। पीएम जनमन योजना में 218 और धरती आबा योजना में 246 मकान मंजूर किए गए हैं। ये आंकड़े मकानों की स्वीकृति के हैं।

सर्वे से क्षेत्र में 22,477 अतिरिक्त मकानों की जरूरत सामने आई है। जिन परिवारों के कच्चे मकानों का सर्वे हो गया है, उनके लिए पक्का मकान बनाने की सहायता जुटाने का प्रयास करने का आश्वासन दिया गया।

किसान इन बातों पर ध्यान दें

  • महिला किसान की औपचारिक पहचान को लेकर मंत्री के आश्वासन और लागू व्यवस्था में फर्क समझें। संबंधित जानकारी के लिए स्थानीय कृषि विभाग से सलाह लें।
  • दाल मिल या कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण का उद्यम चुनने से पहले प्रशिक्षण और तकनीकी जरूरतों पर स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से मार्गदर्शन लें।
  • ऋण और मशीनों के सहयोग को लेकर किए गए प्रयासों के भरोसे को सहायता मिलने की पक्की मंजूरी न मानें।
  • ग्रामीण सड़कों के मामले में भूमिपूजन और निर्माण की स्थिति को अलग-अलग देखें। गांव में कार्यक्रम और सहभागिता का सुझाव दिया गया है।
  • आवास के आंकड़ों में स्वीकृत मकानों और सर्वे में सामने आई अतिरिक्त जरूरत का अंतर ध्यान में रखें।

स्रोत

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