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महिला किसान दिवस 2026: तकनीक, ऋण और नेतृत्व में महिलाओं की पहुंच पर जोर

15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में महिला किसान दिवस पर उत्कृष्ट महिला किसानों को सम्मानित किया गया। आयोजन में तकनीक, संस्थागत सहयोग और खेती के फैसलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

एग्रीवाणी डेस्क · 3 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: हरे-भरे खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Mahmut Yılmaz / Pexels

महिला किसान दिवस 2026 के आयोजन में खेती और उससे जुड़े कामों में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान मिला। साथ ही तकनीक, प्रशिक्षण, संसाधनों और संस्थागत सहयोग तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। किसानों के लिए इसका मुख्य संदेश था कि महिलाओं की भूमिका को खेत के काम तक सीमित न रखकर फैसलों और नेतृत्व में भी मजबूत किया जाए।

पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में कार्यक्रम आयोजित किया। विभाग के सचिव अतीश चंद्रा ने इसकी अध्यक्षता की। विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से प्रगतिशील महिला किसान, कृषि प्रसार से जुड़ी महिलाएं, पदाधिकारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए।

उपलब्धियों का सम्मान, अनुभव साझा करने का मंच

कार्यक्रम में उत्कृष्ट महिला किसानों को उनके कृषि कार्यों और ग्रामीण उद्यमों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान में उनके नए प्रयोगों, नेतृत्व, समर्पण और चुनौतियों के बीच काम आगे बढ़ाने की क्षमता को महत्व दिया गया। आयोजन का विषय कृषि और देश के विकास में महिला किसानों की भूमिका पर केंद्रित था।

महिला किसानों की सफलता की यात्राओं पर एक पुस्तक भी जारी की गई। इसमें खेती तथा उससे जुड़े क्षेत्रों में उनके योगदान, उपलब्धियों और नवाचारों की कहानियां संकलित हैं। कार्यक्रम में कुछ महिला किसानों और प्रसार कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव भी सुनाए। इन अनुभवों से उन्नत खेती अपनाने, ग्रामीण आजीविका मजबूत करने और दूसरी महिलाओं को कृषि में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की उनकी भूमिका सामने आई।

फसल से मूल्यवर्धन तक महिलाओं का योगदान

आयोजन में महिलाओं के योगदान को केवल फसल उगाने तक नहीं देखा गया। पशुधन की देखभाल, बीजों को सहेजना, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, कटाई के बाद के काम और उपज का मूल्य बढ़ाना भी उनकी भूमिका के अहम हिस्से बताए गए। इस तरह महिला किसानों के काम को उत्पादन के साथ आगे की कृषि गतिविधियों से जोड़कर रेखांकित किया गया।

अतीश चंद्रा ने भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, गांवों की आजीविका बनाए रखने और कृषि विकास में महिलाओं के योगदान पर जोर दिया। महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान, उद्यम शुरू करने की पहल और जलवायु के अनुकूल खेती अपनाने को भी महत्व मिला। खेती की उत्पादकता और संसाधनों के संरक्षण के लिहाज से इन भूमिकाओं को जरूरी बताया गया।

आगे तकनीक, ऋण और फैसलों में भागीदारी पर ध्यान

सरकार की प्रतिबद्धता बताते हुए सचिव ने सीधे आय सहयोग, सस्ते संस्थागत ऋण, नई तकनीक पहुंचाने और कौशल प्रशिक्षण का उल्लेख किया। खेती में मशीनों के इस्तेमाल तथा उपज की बिक्री से जुड़े बुनियादी ढांचे तक महिलाओं की बेहतर पहुंच पर भी जोर रहा। महिला किसानों के लिए ये प्राथमिकताएं आर्थिक सहयोग, खेती के साधन और बाजार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच से संबंधित हैं।

आयोजन में आगे की दिशा के तौर पर महिलाओं की क्षमता बढ़ाने और कृषि संबंधी फैसलों में उनकी भागीदारी मजबूत करने की जरूरत सामने रखी गई। कृषि अधिकारी और प्रसार कार्यकर्ता इसमें महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और योजनाओं का मार्गदर्शन देकर अनुसंधान की जानकारी किसानों तक पहुंचाती हैं और वैज्ञानिक तरीके अपनाने में मदद करती हैं।

विज्ञप्ति में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, कृषि प्रसार व प्रशिक्षण संस्थानों और मैनेज में भी महिला किसान दिवस मनाए जाने की जानकारी दी गई। इन आयोजनों में जनजातीय क्षेत्रों से महिला किसानों को जोड़ने पर विशेष ध्यान रहा।

महिला किसानों के लिए काम की बातें

  • वैज्ञानिक खेती और नई तकनीक समझने के लिए कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं से प्रशिक्षण संबंधी जानकारी लें।
  • सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग का मार्गदर्शन कृषि अधिकारियों से लें।
  • फसल उत्पादन के साथ पशुधन, बीज संरक्षण और मूल्यवर्धन से जुड़े अपने अनुभव साझा करें। आयोजन में इन कामों को भी अहम पहचान मिली।
  • खेती के फैसलों और नेतृत्व में अपनी भागीदारी बढ़ाने के अवसरों पर ध्यान दें। कार्यक्रम में इसे महिला सशक्तीकरण की प्रमुख जरूरत बताया गया।

स्रोत

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