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एग्रीकल्चर काउंसिल बनेगी, मानकहीन कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर लगेगी रोक

कृषि शिक्षा के नियमन के लिए जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल बनाने की घोषणा हुई है। एग्रीविजन अधिवेशन के सुझावों पर कार्ययोजना बनाने के लिए प्रतिनिधियों के साथ फिर बैठक होगी।

एग्रीवाणी डेस्क · 3 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: हरे-भरे खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Shabran Niami / Pexels

कृषि की पढ़ाई करने वाले युवाओं की डिग्रियों का महत्व बनाए रखने के लिए सरकार ने नियमन की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की है। पीआईबी की विज्ञप्ति के मुताबिक, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल बनाने की बात कही। उन्होंने मानकों के बिना चलने वाले निजी कृषि कॉलेजों तथा फर्जी डिग्रियों पर सख्त रोक लगाने का ऐलान किया।

दिल्ली के पूसा में एग्रीविजन के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में चौहान ने यह घोषणा की। छोटे और सीमांत किसानों की आमदनी के लिए उन्होंने खेती के साथ दूसरी कृषि गतिविधियां जोड़ने पर जोर दिया। अधिवेशन में सामने आने वाले सुझावों को लेकर प्रतिनिधियों के साथ अगली बैठक भी होगी।

कृषि छात्रों की डिग्रियों का महत्व बनाए रखने पर जोर

घोषित काउंसिल का उद्देश्य कृषि शिक्षा का नियमन करना है। चौहान ने कहा कि महज फीस जुटाने और डिग्रियां देने वाले संस्थानों को इस तरह काम करने की अनुमति नहीं मिलेगी। सरकार कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने पर ध्यान देगी, ताकि युवाओं की तकनीकी पढ़ाई व्यर्थ न जाए।

मंत्री ने बीएससी (एजी) तथा एमएससी (एजी) का उल्लेख करते हुए इन डिग्रियों का महत्व सुरक्षित रखने की बात कही। इस घोषणा का संबंध कृषि छात्रों के भविष्य और निजी कृषि कॉलेजों के मानकों, दोनों से है।

अधिवेशन के सुझावों से बनेगी कार्ययोजना

पीआईबी के मुताबिक, चौहान ने छात्रों तथा किसान संगठनों के अनुभव और विशेषज्ञता को नीतियां तैयार करने में अहम बताया। उन्होंने विशेषज्ञों और छात्रों से विषयों पर गहराई से विचार करके सुझाव देने को कहा। सरकार इन सुझावों को देशहित की नीतियों में बदलने और लागू करने का काम करेगी।

आगे की प्रक्रिया के लिए मंत्री ने प्रतिनिधियों से फिर मिलने की घोषणा की। यह बैठक अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर होगी। इसमें अधिवेशन से निकले सुझावों के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कम अवधि के साथ लंबी अवधि की योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

छोटी जोत पर खेती के साथ दूसरे काम जोड़ने की दिशा

चौहान ने बताया कि भारत की औसत जोत 0.96 हेक्टेयर है। ऐसी स्थिति में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने एकीकृत खेती को जरूरी बताया। इसमें अनाज तक सीमित रहने के बजाय फल और सब्जियों के उत्पादन तथा औषधीय खेती को भी जगह देने की बात रखी गई।

पशुपालन और मछली पालन के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़ने पर भी जोर रहा। प्राकृतिक खेती को भी इस दिशा का हिस्सा बताया गया। मंत्री के अनुसार, खेती में रोबोटिक्स, एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें जोड़ने के प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

भंडारण और निर्यात पर भी ध्यान

कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए चौहान ने बताया कि 2014 से 2024 के दौरान कुल उत्पादन की वृद्धि 49 प्रतिशत रही। उन्होंने देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बताया। उनके अनुसार, अब चुनौती उपज के वैज्ञानिक ढंग से भंडारण, उसके प्रबंधन और दुनिया के बाजारों तक निर्यात की है। किसानों की आजीविका बेहतर करने के साथ भारत को दुनिया की खाद्य जरूरतों में बड़ी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ाना लक्ष्य है।

किसान और कृषि छात्र क्या ध्यान रखें

  • कृषि छात्र मानकों और डिग्रियों के नियमन के लिए घोषित एग्रीकल्चर काउंसिल से जुड़े अगले कदमों पर ध्यान रखें।
  • छोटे किसान अनाज के साथ फल, सब्जी या औषधीय खेती जोड़ने के विकल्प पर स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।
  • पशुपालन, मछली पालन या मधुमक्खी पालन को खेती से जोड़ने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से मार्गदर्शन लें।
  • अधिवेशन के सुझावों पर होने वाली अगली बैठक और उससे बनने वाली कार्ययोजना पर नजर रखें।

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