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एथेनॉल की नई खरीद में गन्ना रस बाहर, मक्का एथेनॉल का प्रोत्साहन घटा

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों की नई निविदा में गन्ने के रस, शर्करा सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं। मक्का आधारित एथेनॉल खरीद योग्य बना है, लेकिन उसका भाव और प्रोत्साहन घटाया गया है।

एग्रीवाणी डेस्क · 3 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: गन्ने का खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Khaya Motsa / Pexels

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल विपणन कंपनियों की नई खरीद निविदा में गन्ने के रस, शर्करा सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं। मक्का आधारित एथेनॉल खरीद योग्य बना हुआ है, लेकिन उसका खरीद भाव और प्रोत्साहन घटाया गया है। रिपोर्ट में एथेनॉल उद्योग को किसानों की उपज के लिए अतिरिक्त मांग का रास्ता बताया गया है, इसलिए खरीद की इन शर्तों का महत्व खेत तक है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने तेल कंपनियों की ओर से 16 अक्टूबर को निविदा जारी की। इसमें लगभग 11 बिलियन लीटर एथेनॉल के लिए बोलियां मांगी गई हैं। आपूर्ति वर्ष 2026-27 की यह खरीद नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 की जरूरतों के लिए है।

चीनी की उपलब्धता और दाम की चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, बदलाव के पीछे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और उसके दाम को काबू में रखने की चिंता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश से उत्पादन घटने का जोखिम बढ़ा है। उत्पादन सीमित होने की स्थिति में गन्ने और चीनी का एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल, खाने के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा कम कर सकता है।

रिपोर्ट में निविदा दस्तावेज के हवाले से बताया गया है कि सरकार ने आपूर्ति वर्ष 2026-27 में एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल को शून्य करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस निविदा को गन्ने से जुड़े सभी प्रकार के एथेनॉल पर रोक नहीं समझना चाहिए। रिपोर्ट में सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की आपूर्ति का विकल्प खुला बताया गया है।

मक्का एथेनॉल की दरों में क्या बदलाव हुआ

रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का आधारित एथेनॉल का खरीद भाव 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इसका प्रोत्साहन भी 5.79 रुपये प्रति लीटर से घटकर 2.79 रुपये प्रति लीटर रह गया है। रिपोर्ट में दी गई ये दरें एथेनॉल की हैं, किसान से खरीदे जाने वाले मक्का की नहीं।

रिपोर्ट का आकलन है कि प्रोत्साहन घटने से मक्का से एथेनॉल बनाकर आपूर्ति करने वाले उत्पादकों की कमाई प्रभावित हो सकती है। किसानों के लिए यहां फर्क समझना जरूरी है: मक्का का मंजूर कच्चे माल में बने रहना और उससे एथेनॉल बनाना कितना लाभकारी होगा, अलग बातें हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खरीद दरों और कच्चे माल की लागत का असर इस पर पड़ता है कि एथेनॉल कारखाने किस सामग्री को प्राथमिकता देंगे।

अनाज की भूमिका बढ़ने की संभावना

रिपोर्ट में बताया गया है कि संशोधित शर्तों में मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल और सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के प्रस्ताव दिए जा सकते हैं। गन्ने के रस, शर्करा सिरप और बी-हैवी शीरे वाले विकल्प बाहर होने से अनाज आधारित उत्पादन तथा सी-हैवी शीरे की भूमिका बढ़ने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, निविदा का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की जरूरत पूरी करना है। इस कार्यक्रम से आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने का प्रयास किया जा रहा है। नई खरीद शर्तों में चीनी की घरेलू जरूरत और ईंधन के लिए कृषि उपज की मांग के बीच संतुलन पर जोर है।

आगे की तैयारी पर रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्पादकों को कच्चे माल की उपलब्धता, खरीद दर और कारखानों की क्षमता का आकलन करना होगा। मंजूर वैकल्पिक सामग्री से निविदा की जरूरत कितनी पूरी होती है, यह मिश्रण लक्ष्य बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

किसान किन बातों पर ध्यान रखें

  • गन्ने से जुड़े सभी विकल्पों को बंद न मानें। रिपोर्ट में सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल को खरीद योग्य बताया गया है।
  • एथेनॉल की दर को मक्का की फसल का खरीद भाव न समझें। रिपोर्ट में बदलाव एथेनॉल की खरीद दर और प्रोत्साहन में बताया गया है।
  • मक्का की मांग में बढ़त को तय न मानें। रिपोर्ट के अनुसार, कारखानों की प्राथमिकता पर कच्चे माल की लागत और उपलब्धता का भी असर होगा।
  • इस खबर के आधार पर फसल संबंधी निर्णय लेने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।

स्रोत

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी डेस्क

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