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कोचिन पोर्ट पर एआई से यात्री जांच का प्रस्ताव, परीक्षण से तय होगा विस्तार

कोचिन पोर्ट पर क्रूज यात्रियों की पहचान कैमरों से जांचने के लिए एआई गलियारे का प्रस्ताव है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी उपयोगिता और आगे विस्तार का फैसला परीक्षण के नतीजों पर निर्भर करेगा।

एग्रीवाणी डेस्क · 3 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: हरे-भरे खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Sergej ***** / Pexels

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोचिन पोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय क्रूज यात्रियों की पहचान जांचने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी एआई पर आधारित गलियारे का प्रस्ताव है। यात्री कैमरों के सामने से गुजरेंगे और प्रणाली उनकी पहचान का मिलान करेगी। रिपोर्ट इसे भारत में इस तरह का पहला संभावित आव्रजन गलियारा बताती है, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव के स्तर पर है।

किसानों के लिए इस खबर का दायरा समझना जरूरी है। यह बंदरगाह पर यात्रियों की प्रवेश जांच से जुड़ी पहल है। रिपोर्ट में फसल की ढुलाई, खाद्य आपूर्ति या कृषि उपज के दाम पर इसके असर का कोई आकलन नहीं दिया गया है। इसलिए इसे खेती या मंडी भाव में बदलाव की सूचना के बजाय यात्री सुविधाओं से जुड़ी खबर के रूप में पढ़ें।

कैमरों से पहचान होगी, अधिकारियों की निगरानी भी रहेगी

रिपोर्ट में बताया गया है कि आव्रजन ब्यूरो और भारतीय पत्तन संघ इस परीक्षण पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे चलते हुए यात्रियों की पहचान जांचेंगे। इससे पासपोर्ट स्कैन कराने और उंगलियों के निशान देने के लिए अलग-अलग जगह रुकने की जरूरत घट सकती है।

मिंट के विवरण के अनुसार, इस व्यवस्था में आव्रजन अधिकारियों की भूमिका बनी रहेगी। वे प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और अतिरिक्त जांच के लिए चिह्नित यात्रियों से सवाल करेंगे। यानी कैमरों वाला गलियारा जांच खत्म करने के लिए नहीं, यात्रियों की आवाजाही और पहचान सत्यापन को साथ चलाने के लिए प्रस्तावित है।

मौजूदा व्यवस्था में परेशानी क्या है

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रवेश करने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रूज यात्री फिलहाल आव्रजन काउंटरों पर उंगलियों के निशान देते हैं। कुछ मामलों में कर्मचारी जहाज पर पहुंचकर यात्रा के दौरान यह काम करते हैं। भारतीय पत्तन संघ के प्रबंध निदेशक विकास नरवाल ने इस व्यवस्था की व्यावहारिक मुश्किलें बताई हैं।

रिपोर्ट में नरवाल के हवाले से बताया गया है कि जहाज पर जांच के काम के लिए कमरे अलग रखने पड़ सकते हैं। इससे क्रूज संचालक यात्रियों को बेचने के लिए कम आवास उपलब्ध करा पाते हैं। एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों के उतरने पर प्रस्तावित गलियारा मददगार हो सकता है। जांच में लगने वाला समय अधिक अनुमान योग्य होने से परिवहन और तट पर भ्रमण की व्यवस्था करना भी आसान हो सकता है। हालांकि समय की बचत कितनी होगी, यह परीक्षण से ही परखा जाएगा।

कोचिन में उपलब्ध सुविधाएं और आगे की प्रक्रिया

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, कोचिन पोर्ट पर समुद्रिका और सागरिका नाम के दो समर्पित क्रूज टर्मिनल हैं। इनमें यात्रियों के एक ही प्रसंस्करण केंद्र में सीमा शुल्क और आव्रजन जांच की सुविधा है। जहाजों की जरूरतों के समन्वय के लिए क्रूज प्रकोष्ठ चौबीसों घंटे काम करता है। मौजूदा सुविधाओं के साथ नई प्रणाली को परखने का आधार यहां उपलब्ध है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय पत्तन संघ अपने बजट से परियोजना का खर्च उठाना चाहता है। तकनीकी साझेदार चुनने के लिए रुचि प्रस्ताव या निविदा की प्रक्रिया पर विचार हो रहा है। नरवाल के अनुसार, प्रतिस्पर्धी चयन से निष्पक्षता और पारदर्शिता को मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षण में जांच का समय, कतारें, प्रणाली की उपलब्धता और यात्रियों को मिलने वाली सहायता जैसे पहलू देखे जा सकते हैं। मुख्य सवाल यह होगा कि तेज आवाजाही के साथ सीमा संबंधी जांच कितनी प्रभावी रहती है। कोचिन के नतीजे दूसरे स्थानों पर ऐसी व्यवस्था लागू करने के फैसलों का आधार बनेंगे।

किसान इस खबर से क्या ध्यान में रखें

  • इसे क्रूज यात्रियों की पहचान जांच का प्रस्ताव समझें, कृषि उपज के व्यापार की व्यवस्था नहीं।
  • प्रस्ताव और चालू सुविधा में फर्क रखें। रिपोर्ट के अनुसार, पहल अभी प्रस्ताव के स्तर पर है।
  • जांच में समय बचने को तय परिणाम न मानें। इसके लिए परीक्षण के निष्कर्ष देखें।
  • कैमरों से जांच का अर्थ अधिकारियों की भूमिका खत्म होना न समझें। अतिरिक्त जांच के लिए उनकी निगरानी बनी रहेगी।

स्रोत

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी डेस्क

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