अक्टूबर 2026 की डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की राष्ट्रीय जलवायु योजना में लोगों की सेहत को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली है। वैश्विक आकलन में अप्रैल में सौंपी गई भारत की योजना को इस मामले में 32 में से 2 अंक मिले हैं। किसानों के लिए इस खबर का अहम पहलू जलवायु नीति में साफ हवा और परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा की जगह है।
रिपोर्ट में जलवायु से जुड़ी बीमारियों और समय से पहले मौत के प्रति भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए इस कमी को गंभीर बताया गया है। यह आकलन खेत की उपज या फसल नुकसान का नहीं, बल्कि जलवायु योजनाओं में स्वास्थ्य संबंधी तैयारी का है। इसलिए किसान इसे स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े नीतिगत सवाल के तौर पर समझें।
किन आधारों पर परखी गईं जलवायु योजनाएं
रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ अलायंस ने अपने हेल्दी एनडीसी स्कोरकार्ड में 132 देशों की योजनाओं की जांच की। इसमें संयुक्त राष्ट्र के जलवायु ढांचे के तहत सौंपी गई 2035 की योजनाएं शामिल थीं। एनडीसी राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताएं हैं। इनके जरिए देश पेरिस समझौते के तहत उत्सर्जन कम करने और जलवायु बदलाव के अनुरूप तैयारी करने के कदम बताते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आकलन में स्वास्थ्य पर असर, वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, आर्थिक संसाधन और निगरानी जैसे पहलू देखे गए। भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र की कार्रवाई और साझा प्रशासनिक कामकाज के लिए कुछ अंक मिले, लेकिन बाकी पहलुओं में कोई अंक नहीं मिला। जापान और न्यूजीलैंड के साथ भारत सबसे निचले स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबिया को 32 में से 29 अंक मिले और वह सबसे आगे रहा। नाइजीरिया को 25 तथा कंबोडिया को 24 अंक मिले। यह तुलना बताती है कि आकलन का केंद्र केवल जलवायु प्रतिबद्धता पेश करना नहीं, उसमें स्वास्थ्य को शामिल करना भी था।
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच अधूरी कड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जलवायु योजना में वायु प्रदूषण संबंधी पहलुओं का उल्लेख नहीं है, जबकि देश पर इससे होने वाली मौतों का भारी बोझ है। आकलन में भारत और जापान के उत्सर्जन घटाने के लक्ष्यों को पेरिस समझौते के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट इसे लोगों को जलवायु संबंधी नुकसान से बचाने की तैयारी में कमी से जोड़ती है।
डाउन टू अर्थ से बातचीत में दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की अनुसंधान और पैरवी की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी ने प्रदूषण, ऊर्जा और जलवायु नीतियों को साथ लाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, भारत की योजना में ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषकों पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। अधूरा दहन इस प्रदूषक का स्रोत है और यह गर्मी बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
किसानों के नजरिये से यहां स्वास्थ्य की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ अलायंस की शोधकर्ता नोवा टेब्बे ने बताया कि कम समय तक वातावरण में रहने वाले जलवायु प्रदूषकों पर तेजी से कार्रवाई के कई लाभ हैं। इससे गर्मी बढ़ने की रफ्तार धीमी करने, स्वास्थ्य को तत्काल फायदा पहुंचाने और खर्च बचाने में मदद मिल सकती है।
अगली योजना और जलवायु वार्ता से क्या उम्मीद
रिपोर्ट में पुणे की फ्लेम यूनिवर्सिटी के सार्वजनिक नीति के प्रोफेसर अंजल प्रकाश ने भारत की अगली एनडीसी में स्वास्थ्य के संकेतक शामिल करने का सुझाव दिया है। उन्होंने अधिक जोखिम वाली आबादी पर जलवायु के असर की जांच, स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती और बिगड़ती हवा से निपटने के उपाय जरूरी बताए। ये विशेषज्ञ की सिफारिशें हैं, घोषित सरकारी कदम नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2026 में तुर्की के अंताल्या में प्रस्तावित जलवायु सम्मेलन में स्वास्थ्य को प्रमुख जगह मिलने की उम्मीद है। ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ अलायंस की नीति प्रमुख जेस बीगली ने विकासशील देशों की जलवायु योजनाएं लागू करने के लिए विकसित देशों से वित्तीय मदद की जरूरत बताई है। आगे की बहस में स्वास्थ्य सुरक्षा के उपायों के साथ उन्हें लागू करने के संसाधन भी अहम रहेंगे।
किसान किन बातों पर ध्यान रखें
- इस खबर को जलवायु नीति में स्वास्थ्य की तैयारी का आकलन समझें, स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान नहीं।
- जलवायु योजनाओं से जुड़ी खबरों में साफ हवा और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय देखें। रिपोर्ट इन दोनों को जलवायु कार्रवाई से जोड़ने की जरूरत बताती है।
- अगली योजना पर चर्चा में अधिक जोखिम वाले लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती पर ध्यान दें। रिपोर्ट में विशेषज्ञ ने इन पहलुओं को शामिल करने का सुझाव दिया है।
- विशेषज्ञों की सिफारिश और सरकारी फैसले में फर्क रखें। स्वास्थ्य संकेतक जोड़ने तथा प्रदूषण से निपटने के उपाय इस रिपोर्ट में सुझाए गए बदलाव हैं।
स्रोत
- India’s climate action plan fails to prioritise health, global scorecard finds, डाउन टू अर्थ (Down To Earth) की रिपोर्ट, 18 अक्टूबर 2026





