किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी जुटाने और आवेदन के लिए अलग-अलग वेबसाइटों पर जाने की जरूरत कम करने के उद्देश्य से संशोधित एग्री वेलफेयर पोर्टल शुरू किया गया है। पीआईबी की 19 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवरात्रि की नवमी पर इसका शुभारंभ किया। मकसद है कि किसान मोबाइल से ही खेती की जानकारी और सरकारी सेवाओं तक पहुंच सकें।
इस पोर्टल पर मंत्रालय की योजनाओं के साथ सब्सिडी, संबंधित नियम और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसानों के लिए इसका महत्व केवल जानकारी देखने तक सीमित नहीं है। पात्रता की ऑनलाइन जांच और सीधे आवेदन की सुविधा भी इसमें शामिल है, जिससे दफ्तरों की भागदौड़ और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
योजनाओं तक पहुंचने के लिए साझा मंच
पीएम-किसान, एग्रीस्टैक और पीएम फसल बीमा योजना तक पहुंचने के लिए पोर्टल साझा प्रवेश व्यवस्था का काम करेगा। अलग-अलग पहल की जानकारी एक मंच पर मिलने से किसान संबंधित सेवा और उसके नियम देख सकेंगे। योजना के बारे में जानने से लेकर आवेदन की प्रक्रिया तक पहुंच को सरल बनाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
विज्ञप्ति में ऑनलाइन पात्रता जांच, सीधे आवेदन और सहायता का पैसा किसान के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था को पारदर्शिता से जोड़ा गया है। किसान के लिए इसका मतलब है कि वह योजना की शर्तों को देखकर अपनी पात्रता समझ सके और आवेदन के लिए सीधे डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल कर सके।
मौसम, मंडी और खेती की जानकारी भी
पोर्टल के जरिए मौसम संबंधी सूचना, मंडी भाव, बीज और खाद की उपलब्धता तथा खेती की नई वैज्ञानिक विधियों की प्रामाणिक जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी। इस तरह यह मंच सरकारी सहायता की जानकारी के साथ खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है।
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की स्थिति को ध्यान में रखकर पोर्टल को हल्का बनाया गया है। इसे साधारण स्मार्टफोन और कमजोर नेटवर्क पर भी आसानी से चलाने योग्य बताया गया है। मोबाइल के अनुकूल व्यवस्था का महत्व उन किसानों के लिए है जो फोन से ही डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते हैं।
सरल भाषा और नियमित जानकारी पर जोर
चौहान ने अधिकारियों को जानकारी नियमित रूप से अद्यतन रखने को कहा है। उन्होंने सही और समय पर मिलने वाली सूचना को पोर्टल की सफलता का आधार बताया। पुरानी अथवा अधूरी जानकारी से भरोसा कमजोर होने की बात भी रखी गई। इसलिए पोर्टल का संचालन केवल सेवाएं जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, सूचनाओं को लगातार नया रखना भी जरूरी होगा।
भाषा और प्रक्रिया आसान रखने का निर्देश खास तौर पर कम पढ़े-लिखे, छोटे तथा सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर दिया गया है। दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए स्क्रीन-रीडर के इस्तेमाल और पोर्टल के हिस्सों तक सरलता से पहुंचने की सुविधा भी रखी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र देंगे प्रशिक्षण
आगे देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसमें किसानों को पोर्टल और डिजिटल साधनों का उपयोग सीखने में मदद दी जाएगी। यानी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ किसानों को उन्हें चलाना सिखाने की तैयारी भी है।
इस मंच से किसानों के अलावा कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्टार्टअप भी जुड़ेंगे। किसान उत्पादक संगठनों तथा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे पोर्टल खेती से जुड़े विभिन्न समूहों को एक साझा डिजिटल व्यवस्था से जोड़ेगा।
किसान इन बातों का ध्यान रखें
- योजना की जानकारी लेते समय पोर्टल पर उसके नियम और पात्रता देखें, फिर संबंधित आवेदन सुविधा का उपयोग करें।
- मौसम, मंडी भाव तथा बीज और खाद की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी के लिए पोर्टल देखें।
- पोर्टल चलाना सीखने और प्रस्तावित प्रशिक्षण अभियान की जानकारी के लिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
- खेती की वैज्ञानिक विधि अपनाने में कोई बात स्पष्ट न हो तो स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।
स्रोत
- मोबाइल पर लाइव रहेगी सरकार; केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को समर्पित किया नया पोर्टल, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, 19 अक्टूबर 2026





