ट्राउट पालकों के लिए बेहतर बिक्री मूल्य, चारे की लागत और बाजार तक पहुंच पिथौरागढ़ की समीक्षा बैठक के प्रमुख मुद्दे रहे। केंद्रीय मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 19 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ कलेक्टरेट में शीतजल मत्स्य पालन समूह की समीक्षा की। इसमें पालन से पहले की जरूरतों से लेकर मछली के भंडारण और बिक्री तक की व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा हुई।
पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में ट्राउट पालकों ने प्रशिक्षण, कौशल विकास और उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चारा मिलने की जरूरत रखी। अधिकारियों ने हिमालयी राज्यों में ट्राउट पालन बढ़ाने की योजना पर विचार किया। किसानों के लिए इसका महत्व केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि लागत और बिक्री से जुड़ी परेशानियों के समाधान में भी है।
दाम और लागत का सवाल किसानों ने उठाया
मुनस्यारी के एक ट्राउट पालक ने बताया कि चारे और परिवहन पर होने वाले अधिक खर्च के मुकाबले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को आपूर्ति की दर कम पड़ती है। यह मुद्दा बताता है कि खरीदार मिलने के साथ आपूर्ति की कीमत का पालन और ढुलाई के खर्च के अनुकूल होना भी जरूरी है।
जिला प्रशासन की प्रस्तुति में बाजार से जुड़ाव बढ़ाने, ट्राउट से अधिक मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने और पालकों को बेहतर दाम दिलाने पर जोर रहा। प्रशासन ने इन समस्याओं पर मत्स्य विभाग के साथ मिलकर काम करने का भरोसा दिया।
सशस्त्र बलों को आपूर्ति की संभावनाएं तलाशने का सुझाव
सचिव ने हिमालयी राज्यों को सुझाव दिया कि वे केंद्रीय मत्स्य विभाग के साथ समन्वय करके आईटीबीपी और दूसरे सशस्त्र बलों को ट्राउट देने के लिए समझौते की संभावनाएं तलाशें। आईटीबीपी के अपर महानिदेशक संजय कुमार गुंज्याल ने सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश में बल के लिए ट्राउट की काफी जरूरत बताई।
पालकों के नजरिये से यह बाजार बढ़ाने की एक संभावित दिशा है। बैठक में खरीद बढ़ाने के लिए सहयोग पर जोर दिया गया, साथ ही सहकारी नेतृत्व वाली व्यवस्था का समर्थन किया गया। इसे तय खरीद का आदेश मानने के बजाय राज्यों और संबंधित संस्थाओं के बीच आगे समन्वय की दिशा के रूप में देखना जरूरी है।
बीज से भंडारण तक की जरूरतों पर बनेगी योजना
देश में केंद्र की ओर से 34 मत्स्य पालन समूह अधिसूचित हैं। पिथौरागढ़ का समूह ठंडे पानी की मछलियों के पालन से जुड़ा है। बैठक में हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को रेनबो ट्राउट पालन के अनुकूल बताया गया।
राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड ने अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना का खाका रखा। इसमें पालन शुरू करने से पहले और उत्पादन के बाद की व्यवस्थाओं में कमियों पर ध्यान दिया गया। सचिव ने बोर्ड को ऐसी परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का सुझाव दिया, जो पालन की तैयारी, उत्पादन और उसके बाद की जरूरतें पूरी करें।
चर्चा में ट्राउट बीज, चारे की उपलब्धता, उत्पादकता, वैज्ञानिक सहयोग और शीत भंडारण प्रमुख विषय रहे। परिवहन तथा निर्यात में सुविधा के लिए हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के नजदीक शीत भंडारण केंद्र बनाने की जरूरत बताई गई। नए उद्यमों और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहा।
प्रसंस्करण और प्रशिक्षण से बाजार की तैयारी
महिला मछली पालक रेखा जोशी ने बताया कि उन्होंने फिश बॉल्स, फिश फिंगर्स तथा फिश मोमोज जैसे उत्पाद बनाना शुरू किया है। इनकी दैनिक बिक्री लगभग 5,000 रुपये है। यह बिक्री का आंकड़ा है, इसे मुनाफा नहीं समझें। उनका अनुभव बैठक में ट्राउट से अधिक मूल्य वाले उत्पाद बनाने के उदाहरण के तौर पर सामने आया।
निर्यात विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पी. जवाहर ने तकनीकी प्रशिक्षण और निर्यात के लिए तैयारी सुधारने की जरूरत बताई। उन्होंने उत्पादन के बाद संभाल, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्रसंस्करण पर जोर दिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वैज्ञानिक पालन पद्धतियों और तकनीकी क्षमता के लिए अनुसंधान आधारित सहयोग की भूमिका बताई गई।
ट्राउट पालक इन बातों पर ध्यान दें
- आपूर्ति के दाम का आकलन करते समय चारे और परिवहन के खर्च को भी ध्यान में रखें। बैठक में पालकों ने इन्हीं खर्चों के मुकाबले कम दर का मुद्दा उठाया।
- बीज, गुणवत्तापूर्ण चारे और वैज्ञानिक पालन से जुड़ी जरूरतों के लिए स्थानीय मत्स्य विभाग से सलाह लें।
- प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने की दिशा में बढ़ने से पहले प्रशिक्षण और गुणवत्ता संबंधी मार्गदर्शन लें। रेखा जोशी का आंकड़ा दैनिक बिक्री का है, सुनिश्चित कमाई का वादा नहीं।
- सशस्त्र बलों को आपूर्ति की संभावनाओं के बारे में मत्स्य विभाग से जानकारी लें। बैठक में इसके लिए समझौते तलाशने और संस्थागत सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
स्रोत
- केंद्रीय मत्स्य विभाग सचिव ने पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य पालन समूह पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की; ट्राउट फार्मिंग के विकास के लिए भविष्य रोडमैप पर चर्चा, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, 19 अक्टूबर 2026





