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सरकारी समर्थन मूल्य पर मसूर खरीद शुरू: ₹7,000 प्रति क्विंटल मिलेगा दाम, 48 घंटे में खाते में आएगा पैसा

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सरकारी समर्थन मूल्य पर मसूर खरीद शुरू: ₹7,000 प्रति क्विंटल मिलेगा दाम, 48 घंटे में खाते में आएगा पैसा

किसान भाइयों, अगर आपने इस बार मसूर की खेती की है और अपनी फसल को सही दाम पर बेचने की चिंता में हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने मसूर की सरकारी खरीद शुरू कर दी है और इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP ₹7,000 प्रति क्विंटल तय किया गया है। इतना ही नहीं, फसल बेचने के बाद महज 48 घंटे के भीतर पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाएगा। यानी अब न बिचौलियों की जरूरत, न कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी।

मसूर की खेती करने वाले किसानों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है। हर साल फसल तैयार होने के बाद किसानों को सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उनकी मेहनत का सही दाम मिलेगा या नहीं। मंडियों में कई बार बिचौलिए और आढ़तिए कम दाम पर फसल खरीदते हैं और किसान मजबूरी में बेच देता है। लेकिन अब सरकारी खरीद केंद्रों पर सीधे बेचने का मौका है, जहां आपको पूरा MSP मिलेगा।

सरकारी खरीद केंद्र पर कैसे बेचें अपनी मसूर

सरकारी खरीद केंद्र पर मसूर बेचने के लिए आपको पहले अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए आपके पास आधार कार्ड, जमीन के कागज यानी खसरा-खतौनी और बैंक पासबुक होनी चाहिए। रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक तारीख और समय दिया जाएगा जब आप अपनी फसल लेकर केंद्र पर जा सकते हैं। फसल की तौल होगी, गुणवत्ता जांची जाएगी और फिर 48 घंटे के भीतर पैसा सीधे आपके खाते में भेज दिया जाएगा।

यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। आपको किसी को कोई कमीशन नहीं देना होगा और न ही किसी की सिफारिश लगानी होगी। बस सही दस्तावेज लेकर जाइए और अपनी फसल का पूरा दाम पाइए।

MSP क्या होता है और यह क्यों जरूरी है

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है जो सरकार किसानों को उनकी फसल के लिए गारंटी देती है। इसका मतलब है कि चाहे बाजार में दाम कितना भी गिर जाए, सरकार आपसे इससे कम दाम पर फसल नहीं खरीदेगी। मसूर के लिए इस बार ₹7,000 प्रति क्विंटल MSP तय किया गया है। यह दाम किसानों की लागत और उचित मुनाफे को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

अगर आप अपनी मसूर खुले बाजार में बेचते हैं और वहां दाम ₹7,000 से कम मिल रहा है, तो आपको सरकारी केंद्र पर ही बेचना चाहिए। इससे आपको नुकसान नहीं होगा और आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा।

48 घंटे में भुगतान की सुविधा क्यों है खास

पहले के जमाने में किसानों को फसल बेचने के बाद हफ्तों तक पैसे का इंतजार करना पड़ता था। कभी-कभी तो महीनों बाद भी पैसा नहीं आता था। इस देरी की वजह से किसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन अब सरकार ने 48 घंटे यानी दो दिन के भीतर सीधे बैंक खाते में पैसा भेजने की व्यवस्था की है। इससे किसानों को नकदी की तंगी नहीं होगी और वे अपनी अगली फसल की तैयारी जल्दी शुरू कर सकते हैं।

यह डिजिटल भुगतान प्रणाली किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव है। पैसा सीधे खाते में आने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और किसान को पूरा पैसा मिलता है।

किन किसानों को मिलेगा फायदा

यह योजना उन सभी किसानों के लिए है जिन्होंने इस रबी सीजन में मसूर की खेती की है। छोटे और सीमांत किसान जिनके पास कम जमीन है, उन्हें इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा होगा। क्योंकि बड़े किसान तो बाजार में अपनी बात मनवा सकते हैं, लेकिन छोटे किसान अक्सर कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। सरकारी खरीद केंद्र पर सभी को एक समान दाम मिलता है, चाहे आपके पास एक बीघा जमीन हो या दस बीघा।

क्या करें अभी

अगर आपने मसूर की खेती की है, तो देर मत कीजिए। अपने नजदीकी सरकारी खरीद केंद्र या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर जानकारी लीजिए। अपने दस्तावेज तैयार रखिए और जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाइए। खरीद का समय सीमित होता है, इसलिए इंतजार मत कीजिए।

अपने आसपास के किसान भाइयों को भी यह जानकारी जरूर दीजिए, क्योंकि हो सकता है उन्हें इसके बारे में पता न हो। एक दूसरे की मदद करना ही हमारी ग्रामीण संस्कृति की पहचान है।

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यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी संवाददाता

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