सीधे खबरों पर जाएं
AgriVaani एग्रीवाणी: खेती का यथार्थ और हिसाबEN English
ताजा

रबी एमएसपी 2027-28 मंजूर, गेहूं का भाव 2610 रुपये प्रति क्विंटल

रबी के विपणन सीजन 2027-28 की एमएसपी में बढ़ोतरी मंजूर हुई है। कुसुम की दर में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल जोड़े गए हैं, जबकि गेहूं में बढ़ोतरी 25 रुपये प्रति क्विंटल है।

एग्रीवाणी डेस्क · 4 मिनट में पढ़ें
स्वचालित रिपोर्ट, संपादकीय निगरानी में
प्रतीकात्मक तस्वीर: गेहूं का खेत
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Mike Bird / Pexels

रबी की उपज के लिए विपणन सीजन 2027-28 की समर्थन दरें बढ़ाने का फैसला हुआ है। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, गेहूं के लिए अब 2610 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय है। रेपसीड और सरसों की नई दर 6613 रुपये प्रति क्विंटल होगी। एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य में इस बदलाव को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मंजूरी दी। समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की।

प्रति क्विंटल रकम के आधार पर कुसुम की एमएसपी सबसे ज्यादा बढ़ी है। बढ़ोतरी में उसके बाद रेपसीड और सरसों हैं। सरकार ने इस फैसले को किसानों की उपज के लिए लाभकारी दाम देने और अलग-अलग फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने से जोड़ा है।

फसलवार नई दर और पिछली एमएसपी

विज्ञप्ति में नई दरों के साथ पिछले विपणन सीजन का मूल्य भी दिया गया है। नीचे हर फसल के लिए 2027-28 की मंजूर एमएसपी, 2026-27 की दर और बढ़ी हुई रकम अलग-अलग पढ़ें। सभी भाव रुपये प्रति क्विंटल में हैं।

  • गेहूं: 2027-28 का समर्थन मूल्य 2610 रुपये प्रति क्विंटल है। 2026-27 में यह 2585 रुपये प्रति क्विंटल था। इस बार 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाए गए हैं।
  • जौ: नई दर 2286 रुपये प्रति क्विंटल तय हुई है। पिछली एमएसपी 2150 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले बढ़ोतरी 136 रुपये प्रति क्विंटल है।
  • चना: समर्थन मूल्य अब 5958 रुपये प्रति क्विंटल है। पहले 5875 रुपये प्रति क्विंटल था। इसमें 83 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी मंजूर हुई है।
  • मसूर: एमएसपी 7390 रुपये प्रति क्विंटल होगी। पिछली दर 7000 रुपये प्रति क्विंटल थी और इस बार बढ़ी रकम 390 रुपये प्रति क्विंटल है।
  • रेपसीड और सरसों: नया समर्थन मूल्य 6613 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। पहले की दर 6200 रुपये प्रति क्विंटल थी। अंतर 413 रुपये प्रति क्विंटल है।
  • कुसुम: एमएसपी अब 7215 रुपये प्रति क्विंटल तय है। पिछले सीजन में 6540 रुपये प्रति क्विंटल मिलने की दर थी। बढ़ोतरी 675 रुपये प्रति क्विंटल है।

लागत के मुकाबले कितना मार्जिन

पीआईबी के मुताबिक, यह फैसला केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है। उस घोषणा में समर्थन मूल्य के लिए लागत का कम से कम 1.5 गुना स्तर तय किया गया था। इसका आधार देशभर की भारित औसत उत्पादन लागत है। विज्ञप्ति में 2027-28 के लिए लागत और उसके ऊपर अपेक्षित मार्जिन का ब्यौरा इस तरह है:

  • गेहूं: उत्पादन लागत 1264 रुपये प्रति क्विंटल है और अपेक्षित मार्जिन 106 प्रतिशत है।
  • जौ: लागत का आंकड़ा 1447 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके मुकाबले मार्जिन 58 प्रतिशत है।
  • चना: लागत 3751 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई है, जबकि मार्जिन 59 प्रतिशत है।
  • मसूर: उत्पादन लागत 3854 रुपये प्रति क्विंटल और अपेक्षित मार्जिन 92 प्रतिशत है।
  • रेपसीड और सरसों: लागत 3367 रुपये प्रति क्विंटल है। लागत के ऊपर मार्जिन 96 प्रतिशत है।
  • कुसुम: उत्पादन लागत 4810 रुपये प्रति क्विंटल है और मार्जिन 50 प्रतिशत है।

उत्पादन लागत में कौन से खर्च जुड़े हैं

विज्ञप्ति की लागत गणना में बाहर से कराए गए काम की मजदूरी, बैलों या मशीनों का खर्च और पट्टे की जमीन का किराया लिया गया है। बीज तथा खाद और उर्वरक पर खर्च भी इसमें आते हैं। सिंचाई के शुल्क और पंप चलाने में लगने वाले डीजल या बिजली की रकम भी गिनी गई है।

इसके अलावा खेती के औजारों तथा कृषि भवनों के मूल्य में आने वाली कमी और कामकाज की पूंजी पर ब्याज शामिल हैं। अन्य खर्चों के साथ परिवार के सदस्यों के श्रम का अनुमानित मूल्य भी जोड़ा गया है। सरकार के अनुसार, अनाज से अलग दलहन और तिलहन को भी ऊंची एमएसपी के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसान इन बातों का ध्यान रखें

  • अपनी फसल की एमएसपी देखते समय विपणन सीजन जांचें। नई दरों और पिछले सीजन की दरों को अलग रखें।
  • प्रति क्विंटल बढ़ी रकम को लागत पर प्रतिशत मार्जिन से अलग समझें। दोनों आंकड़े अलग बातें बताते हैं।
  • खेती के खर्च का हिसाब बनाते समय खरीदी गई सामग्री और मजदूरी के साथ परिवार के श्रम को भी ध्यान में रखें।
  • फसल बदलने का विचार हो तो स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लें।

स्रोत

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी डेस्क

इससे जुड़ी खबरें