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डिस्ट्रीब्यूटरशिप का लालच और लाखों की ठगी: बरेली में साइबर अपराधियों का नया जाल

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प्रतीकात्मक तस्वीर: मोबाइल फोन
प्रतीकात्मक तस्वीर · फोटो: Airam Dato-on / Pexels

बरेली के एक कारोबारी के साथ जो हुआ, वो किसी के भी साथ हो सकता है। एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई, बातों में आए, और देखते ही देखते 5 लाख 79 हजार 300 रुपये खाते से उड़ गए। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है, बल्कि बरेली के किन्शुक अग्रवाल की असली और दर्दनाक सच्चाई है। अगर आप भी कोई कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं या किसी कंपनी की एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।

क्या हुआ था उस शनिवार को

बारादरी थाना क्षेत्र के कालीबाड़ी, होली चौराहा के पास रहने वाले कारोबारी किन्शुक अग्रवाल के व्हाट्सएप पर एक शनिवार को एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कैम्पा कोला कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने किन्शुक को कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का लालच दिया। बात इतनी विश्वास भरी थी कि किन्शुक को शक ही नहीं हुआ।

ठग ने धीरे-धीरे और चालाकी से कई बार में किन्शुक के तीन अलग-अलग बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करा लिए। ये खाते थे एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और एचडीएफसी बैंक। कुल मिलाकर 5,79,300 रुपये की ठगी हुई। जैसे ही सारे पैसे ट्रांसफर हो गए, ठग ने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया और गायब हो गया।

जब होश आया तो बहुत देर हो चुकी थी

जब किन्शुक को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तब तक ठग फरार हो चुका था। उन्होंने तुरंत साइबर थाने में जाकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू हो गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या पैसे वापस मिलेंगे? साइबर ठगी के मामलों में पैसे वापस मिलना बेहद मुश्किल होता है, इसलिए सावधानी पहले जरूरी है।

साइबर ठगों का यह तरीका नया नहीं है

यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी और जानी-मानी कंपनी का नाम लेकर लोगों को ठगा गया हो। ठग हमेशा उन कंपनियों का नाम इस्तेमाल करते हैं जो लोगों में लोकप्रिय हों और जिन पर भरोसा हो। कैम्पा कोला एक जानी-मानी कंपनी है, इसलिए उसका नाम सुनकर किन्शुक को शक नहीं हुआ।

ठग आमतौर पर व्हाट्सएप, टेलीग्राम या फोन कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे खुद को किसी बड़ी कंपनी का अधिकारी बताते हैं। फिर एजेंसी, डिस्ट्रीब्यूटरशिप, फ्रेंचाइजी या नौकरी का लालच देते हैं। रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसे मांगते हैं। जैसे ही पैसे मिल जाते हैं, फोन बंद कर देते हैं।

किसान और कारोबारी भाइयों के लिए जरूरी सावधानियां

अगर आप खेती से जुड़े किसी कारोबार में हाथ आजमाना चाहते हैं, जैसे कि बीज, खाद, कीटनाशक, या कृषि उपकरण की डिस्ट्रीब्यूटरशिप, तो इन बातों का हमेशा ध्यान रखें।

पहली बात, किसी भी कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप या एजेंसी लेने से पहले उस कंपनी के आधिकारिक दफ्तर में जाकर मिलें। सिर्फ फोन या व्हाट्सएप पर की गई बातों पर भरोसा न करें।

दूसरी बात, किसी भी अनजान नंबर से आई कॉल पर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें, चाहे बात कितनी भी विश्वासजनक क्यों न लगे।

तीसरी बात, अगर कोई आपसे रजिस्ट्रेशन फीस या सिक्योरिटी के नाम पर पैसे मांगे, तो पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या उनके टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।

चौथी बात, साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। यह साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

पांचवीं बात, अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों को भी इस तरह की ठगी के बारे में बताएं ताकि वे भी सावधान रहें।

आपकी मेहनत की कमाई आपकी है, उसे बचाएं

किन्शुक अग्रवाल की तरह कई लोग हर साल साइबर ठगी का शिकार होते हैं। खेती-किसानी और कारोबार में पहले ही बहुत मेहनत लगती है। ऐसे में अगर मेहनत की कमाई किसी ठग के हाथ चली जाए, तो दुख और भी बड़ा होता है। इसलिए सतर्क रहें, जागरूक रहें और किसी भी लालच में आने से पहले एक बार ठंडे दिमाग से सोचें। याद रखें, कोई भी असली कंपनी आपसे पहले पैसे नहीं मांगती, वह पहले आपसे मिलती है, दस्तावेज देखती है और फिर समझौता करती है।

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