नई दिल्ली: देश के करोड़ों किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बदलाव और उन्हें बेहतर बनाने के लिए नए दिशा-निर्देशों का एक ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मकसद योजना का दायरा बढ़ाना, काम करने के तरीके को आसान बनाना और खेती-किसानी की नई जरूरतों को पूरा करना है।
लोन की अवधि को फसल चक्र के साथ तालमेल बिठाने के लिए, KCC की वैलिडिटी को बढ़ाकर 6 साल करने का प्रस्ताव है। रेगुलेटेड संस्थाएं, आम लोग और अन्य स्टेकहोल्डर 6 मार्च, 2026 तक ड्राफ्ट पर टिप्पणियां और सुझाव दे सकते हैं। आरबीआई ने केसीसी ऋण की स्वीकृति और पुनर्भुगतान कार्यक्रम में एकरूपता लाने के लिए फसल सत्रों की अवधि को मानकीकृत करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को 12 माह के चक्र और लंबी अवधि वाली फसलों को 18 माह के चक्र के रूप में परिभाषित किया गया है।
इस मसौदे में केसीसी के तहत निकासी सीमा को प्रत्येक फसल सत्र के लिए फसल की अनुमानित लागत के साथ समायोजित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसानों को वास्तविक खेती लागत के अनुरूप पर्याप्त ऋण मिल सके। इसके अलावा, मिट्टी की जांच, वास्तविक समय में मौसम पूर्वानुमान और जैविक एवं उत्तम कृषि पद्धतियों के प्रमाणन जैसे तकनीकी खर्चों को भी पात्र मद में शामिल किया गया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी के मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य में केसीसी से संबंधित इन संशोधनों की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश बजट में किसानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। उन्होंने कहा था कि किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाएगी।





