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AgriVaani एग्रीवाणी: खेती का यथार्थ और हिसाबEN English
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ऑयस्टर मशरूम उगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कृषि वैज्ञानिक की सलाह से बचें भारी नुकसान से

· 3 मिनट में पढ़ें

ऑयस्टर मशरूम की खेती आजकल किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। कम जगह में अच्छी कमाई का यह जरिया कई लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खेती को लेकर एक बड़ी गलतफहमी है जो किसानों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है? अजमेर के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दिनेश कच्छावा ने इस बारे में बेहद जरूरी जानकारी साझा की है जो हर उस किसान को पता होनी चाहिए जो ऑयस्टर मशरूम की खेती करना चाहता है या पहले से कर रहा है।

सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है?

बहुत से किसानों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि ऑयस्टर मशरूम की खेती पूरे साल की जा सकती है। यह सुनने में अच्छा लगता है क्योंकि इसका मतलब होता है साल के बारह महीने कमाई। लेकिन कृषि विशेषज्ञ इस सोच को पूरी तरह गलत मानते हैं। ऑयस्टर मशरूम एक ऐसी फसल है जो तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। इसे बढ़ने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। यही वह दायरा है जिसमें यह मशरूम सबसे अच्छी तरह पनपता है और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन देता है।

अजमेर जैसे इलाकों में गर्मियों के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इतने अधिक तापमान में ऑयस्टर मशरूम की खेती करना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि नुकसानदायक भी हो सकता है। ऐसे में जो किसान यह सोचकर खेती शुरू करते हैं कि वे साल भर कमाई करेंगे, उन्हें गर्मियों में भारी निराशा का सामना करना पड़ सकता है।

कौन सा समय है सबसे सही?

कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर के वैज्ञानिक दिनेश कच्छावा के अनुसार ऑयस्टर मशरूम की खेती के लिए फरवरी से मई का समय सबसे उपयुक्त है। इस दौरान तापमान मशरूम की जरूरत के अनुसार होता है और वातावरण में नमी भी बनाए रखना आसान होता है। इस मौसम में उत्पादन अधिक मात्रा में होता है और मशरूम की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। यानी इस समय में खेती करने पर किसान को दोहरा फायदा मिलता है, ज्यादा पैदावार और अच्छी क्वालिटी।

गर्मियों में क्यों होता है नुकसान?

जब तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो ऑयस्टर मशरूम की खेती में कई तरह की मुश्किलें आने लगती हैं। पहली बात, अधिक गर्मी में कीड़े और बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मशरूम की फसल पर कीट आसानी से हमला कर देते हैं और बीमारियां तेजी से फैलती हैं। दूसरी बात, गर्मी में नमी बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है। मशरूम को बढ़ने के लिए एक खास स्तर की नमी चाहिए होती है और तेज गर्मी उस नमी को जल्दी सोख लेती है। इन दोनों कारणों से फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।

क्या साल भर खेती बिल्कुल संभव नहीं?

अगर कोई किसान वाकई साल भर ऑयस्टर मशरूम उगाना चाहता है तो इसके लिए कूलिंग सिस्टम जैसी महंगी तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ता है। इस तकनीक से कमरे का तापमान नियंत्रित रखा जाता है ताकि मशरूम को उसकी जरूरत के अनुसार वातावरण मिल सके। लेकिन यह तकनीक बहुत महंगी है। इससे खेती की लागत बहुत अधिक बढ़ जाती है और फिर मुनाफे का हिसाब उतना आसान नहीं रहता जितना शुरुआत में लगता था। छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए यह खर्च उठाना अक्सर व्यावहारिक नहीं होता।

किसानों के लिए क्या है सही रास्ता?

कृषि विशेषज्ञों की सलाह यह है कि किसानों को मौसम के हिसाब से ऑयस्टर मशरूम की खेती करनी चाहिए। जब मौसम अनुकूल हो यानी फरवरी से मई के बीच, उस समय पूरी मेहनत और लगन के साथ खेती करें। इस दौरान कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलता है और नुकसान की संभावना भी कम रहती है। मौसम के खिलाफ जाकर खेती करने से न सिर्फ उत्पादन कम होता है बल्कि अतिरिक्त खर्च भी बढ़ता है।

ऑयस्टर मशरूम की खेती एक बेहतरीन विकल्प है लेकिन इसे सही समय पर और सही तरीके से करना जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को ध्यान में रखकर खेती करें, तभी यह फायदे का सौदा बनेगी। अगर आप इस खेती में रुचि रखते हैं तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और विशेषज्ञों से सही मार्गदर्शन लें।

यह खबर किसी किसान साथी के काम आ सकती है

लेखक

एग्रीवाणी संवाददाता

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